घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 — कोलकाता में कानूनी अधिकार
Domestic Violence Act 2005 के तहत महिलाओं के कानूनी अधिकार — शिकायत कैसे करें, Protection Officer, राहत आदेश, निवास का अधिकार, गुजारा भत्ता और कोलकाता में मुफ्त कानूनी सहायता।
विषय सूची
घरेलू हिंसा (Domestic Violence) — यह केवल शारीरिक मारपीट नहीं है। मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक शोषण भी घरेलू हिंसा के ही रूप हैं। भारत में हर तीसरी महिला किसी न किसी रूप में घरेलू हिंसा का सामना करती है।
Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDVA) एक सिविल कानून है जो महिलाओं को तत्काल राहत और संरक्षण प्रदान करता है।
🆘 तत्काल सहायता
यदि आप या आपकी कोई जानकार घरेलू हिंसा का सामना कर रही है, तो तुरंत 1091 (Women Helpline) या 100 (Police) पर कॉल करें। कानूनी सहायता के लिए +91 90070 00603 पर संपर्क करें।
घरेलू हिंसा के प्रकार
PWDVA के तहत घरेलू हिंसा में शामिल हैं:
- शारीरिक हिंसा (Physical Abuse): मारपीट, धक्का देना, हथियार से हमला, शारीरिक चोट पहुंचाना
- मानसिक/भावनात्मक हिंसा: अपमानित करना, धमकी देना, लगातार आलोचना, अलग-थलग करना
- यौन हिंसा (Sexual Abuse): बिना सहमति के यौन संबंध, जबरदस्ती
- आर्थिक हिंसा (Economic Abuse): पैसे/संपत्ति से वंचित करना, स्त्रीधन हड़पना, काम करने से रोकना
- मौखिक हिंसा (Verbal Abuse): गाली-गलौज, नस्ल/रंग/दहेज को लेकर ताने
शिकायत कैसे करें — स्टेप बाय स्टेप
चरण 1 — Protection Officer से संपर्क: हर जिले में एक Protection Officer नियुक्त होता है। कोलकाता में, DM Office या Social Welfare Department से संपर्क करें।
चरण 2 — Domestic Incident Report (DIR): Protection Officer एक DIR तैयार करेगा जिसमें घरेलू हिंसा का विवरण दर्ज होगा।
चरण 3 — मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन: DIR के आधार पर या सीधे, Metropolitan Magistrate के सामने Section 12 के तहत आवेदन दाखिल करें।
चरण 4 — सुनवाई और अंतरिम आदेश: कोर्ट पहली सुनवाई पर ही अंतरिम राहत आदेश (Interim Relief) पारित कर सकती है।
राहत आदेश (Relief Orders)
कोर्ट निम्नलिखित आदेश पारित कर सकती है:
- Protection Order (Section 18): आरोपी को हिंसा से रोकने का आदेश
- Residence Order (Section 19): महिला को साझा घर में रहने का अधिकार
- Monetary Relief (Section 20): गुजारा भत्ता और चिकित्सा खर्च
- Custody Order (Section 21): बच्चों की अस्थायी कस्टडी
- Compensation Order (Section 22): मानसिक/शारीरिक क्षति का मुआवजा
निवास का अधिकार (Right to Residence)
PWDVA का सबसे मजबूत प्रावधान है — Section 17 और 19। पीड़ित महिला को 'Shared Household' (साझा घर) में रहने का अधिकार है, चाहे उसके नाम पर घर हो या नहीं। पति उसे घर से नहीं निकाल सकता।
कोलकाता में सहायता और संसाधन
कोलकाता में घरेलू हिंसा पीड़िताओं के लिए:
- Women Helpline: 1091 (24x7)
- Protection Officer, Kolkata: Social Welfare Department, Salt Lake
- DLSA Kolkata: मुफ्त कानूनी सहायता — Bankshall Court परिसर
- One Stop Centre (Sakhi): अस्थायी आश्रय और काउंसलिंग