भारत में तलाक कानून — पूर्ण गाइड 2026
भारत में तलाक कानूनों की पूर्ण गाइड — हिंदू मैरिज एक्ट, स्पेशल मैरिज एक्ट, आपसी सहमति से तलाक, विवादित तलाक, गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और कोलकाता फैमिली कोर्ट प्रक्रिया।
विषय सूची
तलाक — यह शब्द सुनते ही मन में कई भावनाएं उमड़ती हैं। लेकिन जब वैवाहिक जीवन असहनीय हो जाए, तो कानूनी रास्ता अपनाना ही उचित है। भारत में विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं, और उनके तहत तलाक के प्रावधान भी अलग-अलग हैं।
यह गाइड 2026 के लिए अपडेटेड है और इसमें कोलकाता फैमिली कोर्ट की प्रक्रिया विशेष रूप से बताई गई है।
तलाक के प्रकार — आपसी सहमति और विवादित
आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce): जब दोनों पति-पत्नी तलाक के लिए सहमत हों। इसमें कम से कम 1 साल तक अलग रहना जरूरी है और 6-18 महीने के भीतर तलाक हो सकता है। Section 13B Hindu Marriage Act और Section 28 Special Marriage Act के तहत।
विवादित तलाक (Contested Divorce): जब एक पक्ष तलाक चाहता है लेकिन दूसरा नहीं। इसमें क्रूरता, व्यभिचार, परित्याग, मानसिक विकार, धर्म परिवर्तन आदि आधारों पर तलाक की मांग की जा सकती है।
Hindu Marriage Act, 1955
यह अधिनियम हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों पर लागू होता है। इसके तहत तलाक के मुख्य आधार:
- क्रूरता (Cruelty): शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न
- व्यभिचार (Adultery): विवाहेतर संबंध
- परित्याग (Desertion): 2 वर्ष से अधिक समय तक बिना उचित कारण साथ छोड़ना
- धर्म परिवर्तन: दूसरे धर्म में परिवर्तित होना
- मानसिक विकार: लाइलाज मानसिक बीमारी
- 7 वर्ष तक लापता: सात साल तक जीवित न मिलना
📌 Supreme Court का महत्वपूर्ण फैसला
Supreme Court ने Shilpa Sailesh vs Varun Sreenivasan (2023) में Article 142 के तहत 'Irretrievable Breakdown of Marriage' को तलाक का आधार माना है, भले ही कोई कानूनी आधार न हो।
कोलकाता फैमिली कोर्ट में प्रक्रिया
कोलकाता में तलाक केस दाखिल करने की प्रक्रिया:
चरण 1 — पिटीशन तैयार करें: वकील की मदद से तलाक की पिटीशन तैयार करें जिसमें विवाह का विवरण, तलाक का आधार, और मांगी गई राहत (गुजारा भत्ता, कस्टडी) शामिल हों।
चरण 2 — फैमिली कोर्ट में दाखिल: कोलकाता फैमिली कोर्ट (City Civil Court परिसर) में पिटीशन दाखिल करें।
चरण 3 — मीडिएशन: कोर्ट पहले मीडिएशन (Mediation) का प्रयास करती है। यदि सुलह नहीं होती, तो केस आगे बढ़ता है।
चरण 4 — सुनवाई: दोनों पक्षों के साक्ष्य और बहस के बाद कोर्ट फैसला सुनाती है।
गुजारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी
गुजारा भत्ता (Maintenance): Section 125 CrPC के तहत पति को पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करना होता है। राशि दोनों की आय और जीवन स्तर पर निर्भर करती है।
बच्चों की कस्टडी: कोर्ट बच्चे के कल्याण (Welfare of the Child) को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। आमतौर पर 5 वर्ष से छोटे बच्चे की कस्टडी मां को दी जाती है।
स्त्रीधन (Streedhan): पत्नी को अपना सारा स्त्रीधन (विवाह में मिला सामान, गहने, आदि) वापस पाने का अधिकार है।